
नैचुरल
बेड का वही चेहरा जैसा खदान में चिरता है। हल्की ऊँच-नीच, कुदरती पकड़, और कोई दो टुकड़े एक जैसे नहीं।
किसके लिए सही: बाहर की पेविंग, आँगन, रस्टिक अंदरूनी काम, रैंप

सरफ़ेस ट्रीटमेंट
एक ही स्लैब देहाती, आधुनिक या शानदार दिख सकती है — फ़र्क़ सिर्फ़ इस बात का है कि उसकी सतह पर क्या किया गया। और गीले में फ़र्श सुरक्षित रहेगा या नहीं, यह रंग नहीं बल्कि फ़िनिश तय करती है।
नीचे दी गई ज़्यादातर फ़िनिश नीले-स्लेटी, ग्रीन और ब्राउन कोटा तथा रेड मंदाना — सब पर मिलती हैं; कॉटन और रिवर फ़िनिश यहाँ सिर्फ़ ब्लू और ब्राउन कोटा पर दिखाई गई हैं। नीचे का पत्थर एक ही होने की वजह से दो फ़िनिश आमने-सामने चलाना — जैसे होन्ड फ़र्श के साथ उसी माल की हाथ से घड़ी ख़ास दीवार — आपको बिना किसी अतिरिक्त माल-ख़र्च के बनावट का फ़र्क़ दे देता है।

बेड का वही चेहरा जैसा खदान में चिरता है। हल्की ऊँच-नीच, कुदरती पकड़, और कोई दो टुकड़े एक जैसे नहीं।
किसके लिए सही: बाहर की पेविंग, आँगन, रस्टिक अंदरूनी काम, रैंप

सब चेहरों पर गैंग सॉ से काटकर सपाट, एक-सी सतह, जिस पर मशीन की बारीक बनावट रहती है। कैलिब्रेशन का आधार यही है।
किसके लिए सही: क्लैडिंग, आम फ़र्श, आगे फ़िनिश करने के लिए आधार

डायमंड लाइन पर काटकर बिलकुल चौकोर किनारा और साफ़, बराबर चेहरा। तंग जोड़ पर लगता है और साइट पर किनारे का कोई काम नहीं चाहिए।
किसके लिए सही: आम फ़र्श, जहाँ चमक से ज़्यादा साफ़ जोड़ मायने रखता है

समतल और चिकना घिसकर हल्की चमक वाला मैट। पैरों को आरामदेह, कम चौंध, और रगड़ के निशान छिपा लेता है।
किसके लिए सही: अंदरूनी फ़र्श, सीढ़ियाँ, काउंटर, आधुनिक काम

टेबल लाइन से निकली साटन पॉलिश — होन्ड से ज़्यादा उजली और चमकदार, पर पूरी मिरर बफ़ से एक दर्जा पहले। समझदारी वाला बीच का रास्ता।
किसके लिए सही: वे अंदरूनी फ़र्श जिनमें चमक चाहिए, पर मिरर जैसी चौंध और फिसलन नहीं

कटे हुए चेहरे पर नहीं, बल्कि पत्थर के खुरदुरे, जैसे-चिरे चेहरे पर बनाई गई हल्की, पानी जैसी चमक — पूरी मिरर से ठंडी और कम चमकदार, और सख़्त सपाट चमक की जगह सतह पर हल्की हलचल के साथ।
किसके लिए सही: वे अंदरूनी फ़र्श और ख़ास जगहें जिनमें पूरी पॉलिश के बिना हल्की चमक चाहिए

क्रम से घिसते-घिसते पूरी चमक तक। रंग को बहुत गहरा कर देती है, ख़ासकर ग्रीन कोटा पर।
किसके लिए सही: लॉबी, शोरूम, ख़ास दीवारें, टेबल टॉप

घिसाई वाले हेड से ब्रश करके हल्का, बारीक बनावट वाला मैट। रिवर की तरह यह भी कटे हुए चेहरे पर नहीं, पत्थर के खुरदुरे चेहरे पर की जाती है। लेदर या एंटीक — दोनों नामों से यही एक फ़िनिश बिकती है, और जो हम चलाते हैं उनमें सबसे माफ़ करने वाली यही है।
किसके लिए सही: प्रीमियम अंदरूनी काम, वैनिटी, गीली जगहें, ख़ास क्लैडिंग

बारीक, घनी कंकरीली बनावट और हल्का मैट चेहरा — पैरों के नीचे बराबर, कोई चमक नहीं, और पॉलिश जैसी चौंध बिलकुल नहीं।
किसके लिए सही: बाहर की पेविंग, आँगन और गीली जगहें, जहाँ मैट और पकड़ वाली सतह चाहिए

हाथ से छेनी मारकर उभरी हुई तीन-आयामी बनावट, जो दीवार पर छाया डालती है। हम इसे हाथ से घड़ा, छेनी वाला या बनावटी पत्थर कहते हैं — घड़ाई वाला माल। रॉक फ़ेस्ड भी यही फ़िनिश है।
किसके लिए सही: ख़ास दीवारें, चारदीवारी और प्लिंथ की क्लैडिंग, एलिवेशन

आधी पॉलिश वाला चेहरा, हल्की और एक-सी चमक के साथ — होन्ड से ज़्यादा उजला, पूरी मिरर से एक दर्जा पहले, और पॉलिश फ़र्श से कहीं कम फिसलन वाला।
किसके लिए सही: वे अंदरूनी फ़र्श और दीवारें जिनमें चमक चाहिए, पर चौंध और फिसलन नहीं

स्लैब के डायमंड-कट चेहरे पर की गई पॉलिश, खुरदुरे चेहरे पर नहीं — यही लैपाट्रो को रिवर और लेदर से अलग करता है। इससे हल्की, दानेदार चमक बनती है जिसमें संतरे के छिलके जैसी बारीक बनावट रहती है: होन्ड से ज़्यादा उजली, मिरर से ठंडी, और पॉलिश फ़र्श से कहीं कम फिसलन वाली।
किसके लिए सही: वे अंदरूनी फ़र्श जिनमें चमक चाहिए, पर चौंध और फिसलन नहीं

किनारे घिसाकर और चेहरे नरम करके पुराना, इस्तेमाल-किया-हुआ रूप दिया जाता है। कोबल्स और सेट्स में यही आम है।
किसके लिए सही: ड्राइववे, बग़ीचे के रास्ते, हेरिटेज और मरम्मत

यह गर्मी या ब्लास्ट से बनी बनावट है, हाथ या मशीन से नहीं — आँच या छर्रा ऊपर के रवे उड़ा देता है और पीछे बारीक, दानेदार, पकड़ वाला चेहरा छूटता है जिसमें कोई पहल नहीं होती। यह ज़्यादातर ब्लैक बेसाल्ट पर चलती है, क्योंकि कोटा और मंदाना में उतनी रवेदार बनावट नहीं होती कि वे उसी तरह फ़्लेम हो सकें।
किसके लिए सही: बेसाल्ट पेविंग, रैंप, पूल के चारों तरफ़ — हर वह जगह जहाँ दिखने से ज़्यादा पैरों की पकड़ मायने रखती है
चुनाव
फिसलन रोकना स्पेसिफ़िकेशन का फ़ैसला है, बाद में सोचने की बात नहीं। पत्थर के फ़र्श की ज़्यादातर शिकायतें घूम-फिरकर वहीं पहुँचती हैं जहाँ पॉलिश ऐसी जगह लगा दी गई जहाँ कभी लगनी ही नहीं चाहिए थी।
| लोकेशन | सुझाई गई फ़िनिश | क्यों |
|---|---|---|
| अंदरूनी फ़र्श, सूखा | होन्ड या पॉलिश | आराम, दिखावट, झाड़ू लगाने में आसान |
| अंदरूनी फ़र्श, गीला (बाथरूम, रसोई) | ग्रूव्ड या लेदर | गीले में भी पक्की पकड़ |
| सीढ़ी के ट्रेड | होन्ड, ग्रूव्ड नोज़िंग के साथ | सुरक्षित किनारा, बिना फिसलन वाले चलने की जगह |
| रैंप और ढलान | ग्रूव्ड या नैचुरल | भार के नीचे एक दिशा में पकड़ |
| बाहर की पेविंग, पैदल चलने वाली | नैचुरल या बुश-हैमर्ड | हर दिशा में पकड़, मौसम में टिकाऊ |
| पूल के चारों तरफ़ | बुश-हैमर्ड या ग्रूव्ड | गीले में पकड़, और गर्मी कम पकड़ता है |
| ड्राइववे | नैचुरल स्प्लिट कोबल्स | पकड़, और एक-एक टुकड़ा बदलने की सुविधा |
| ख़ास दीवार | रॉक फ़ेस्ड या लेदर | छाया वाला उभार, या हल्का छूने लायक़ मैट |
| काउंटर / वैनिटी टॉप | लेदर या पॉलिश | निशान छिपाता है, या रंग की सबसे ज़्यादा गहराई |
| एलिवेशन क्लैडिंग | रॉक फ़ेस्ड, होन्ड या सॉन | मौसम में टिकाऊपन और भरा-भरा दिखना |
कैलिब्रेशन
नॉन-कैलिब्रेटेड पत्थर में मोटाई का कुदरती फ़र्क़ रहता है — नाम का 25 mm स्लैब 22 से 28 mm तक निकल सकता है। मिस्त्री उसे मसाले के बेड में सोखता है, यानी बेड मोटा, माल ज़्यादा और काम धीमा।
कैलिब्रेटेड पत्थर को घिसकर क़रीब ±1 mm के भीतर एक-सी मोटाई पर लाया जाता है। प्रति वर्ग फुट दाम ज़्यादा है, पर लगता तेज़ है, अडहेसिव कम लगता है, और थिन-बेड अडहेसिव सिस्टम में तो यह ज़रूरी ही है।

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